किसी की मालिकी अधिकार नहीं: चांद पर जमीन का किसी भी देश या व्यक्ति के पास मालिकी अधिकार नहीं है।

सार्वजनिक संपत्ति:  चांद पर कोई एक व्यक्ति या राज्य का प्रमुख नहीं है, और इसे सार्वजनिक संपत्ति माना जाता है। 

राजा-मंत्री का दावा:  1967 में, भारतीय वैज्ञानिक विक्रम साराभाई ने चांद पर जमीन का दावा किया था, लेकिन इसका कोई आधिकारिक मान्यता नहीं है। 

अंतरराष्ट्रीय चाँद अनुसंधान:  चांद पर अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान अभियांत्रिकी और वैज्ञानिक संगठनों द्वारा की गई है, लेकिन इससे किसी को चांद की मालिकी अधिकार नहीं मिलते। 

कॉस्मिक ट्रीटी:  चांद पर किसी कॉस्मिक ट्रीटी या संपत्ति रजिस्ट्री का अस्तित्व नहीं है, क्योंकि यह ग्रह हमारे बाहर है। 

अंतरराष्ट्रीय सूचना:    चांद पर किसी कॉस्मिक ट्रीटी या संपत्ति रजिस्ट्री का अस्तित्व नहीं है, क्योंकि यह ग्रह हमारे बाहर है। 

सूरक्षित ग्रह:     चांद पर किसी कॉस्मिक ट्रीटी या संपत्ति रजिस्ट्री का अस्तित्व नहीं है, क्योंकि यह ग्रह हमारे बाहर है। 

सूरक्षित ग्रह:     चांद को अंतरराष्ट्रीय सूचना के अनुसार सूरक्षित ग्रह माना जाता है, और वहां की संपत्ति का दावा नहीं किया जा सकता है।  

मैन्यूफैक्चर्ड डिस्प्लेमेंट:     कोई भी देश चांद पर अपनी गैर-धारात्मिक वस्तुओं का निर्माण या डिस्प्लेमेंट नहीं कर सकता है।  

अंतरराष्ट्रीय सहमति:      चांद पर किसी भी रजिस्ट्री की अंतरराष्ट्रीय सहमति नहीं है और यह एक अंतरराष्ट्रीय स्थिति है। 

ग्रह की ज़मीन नहीं:       चांद पर किसी भी रजिस्ट्री की अंतरराष्ट्रीय सहमति नहीं है और यह एक अंतरराष्ट्रीय स्थिति है। 

ग्रह की ज़मीन नहीं:       इसलिए, चांद पर किसी असली मालिक की रजिस्ट्री नहीं होती है, और यह ग्रह सार्वजनिक संपत्ति के रूप में माना जाता है। ।